Prabhat Times
नई दिल्ली। कई माह से कृषि कानूनों (agriculture bill) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है। सी.जे.आई. द्वारा अनिश्चितकाल के लिए लगाई गई रोक के साथ मामला सुलझाने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी भी गठित की है।
लंबी बहस के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के लागू होने पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है. सीजेआई ने कहा कि ये रोक अनिश्चितकाल के लिए है. कोर्ट ने किसानों की समस्याओं और सरकार के साथ गतिरोध को सुलझाने के लिए 4 सदस्यीय कमिटी भी बना दी है.

ये होंगे कमेटी के सदस्य

किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सीजेआई एसए बोबडे ने 4 मेंबर की कमिटी बनाई है. इसमें भारतीय किसान यूनियन के जितेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल शेतकारी शामिल हैं.
गणतंत्र दिवस बाधित करने की आशंका वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है.
30 लाख सदस्य होने का दावा करने वाले भारतीय किसान संघ ने कमिटी बनाने का समर्थन किया, लेकिन कानूनों के अमल पर रोक का विरोध किया. फल उत्पादक किसानों की संस्था ने भी कानूनों पर रोक नहीं लगाने की मांग की. वहीं, एटॉर्नी जनरल ने भी कमिटी के गठन का स्वागत किया.

अदालत में ये दी गई दलीलें

अदालत में किसानों की ओर से ML शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के पक्ष में नहीं हैं, हम कानूनों की वापसी ही चाहते हैं. एमएल शर्मा की ओर से अदालत में कहा गया कि आजतक पीएम उनसे मिलने नहीं आए हैं, हमारी जमीन बेच दी जाएंगी. जिसपर चीफ जस्टिस ने पूछा कि जमीन बिक जाएंगी ये कौन कह रहा है? वकील की ओर से बताया गया कि अगर हम कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट में जाएंगे और फसल क्वालिटी की पैदा नहीं हुई, तो कंपनी उनसे भरपाई मांगेगी.
सीजेआई ने कहा कि जो वकील हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता कि जब आदेश सही न लगे तो अस्वीकार करने लगें. इसके बाद वकील ने कहा कि किसान कल मरने की बजाय आज मरने को तैयार है. इसको लेकर सीजेआई ने कहा कि हम इसे जीवन-मौत के मामले की तरह नहीं देख रहे. हमारे सामने कानून की वैधता का सवाल है. क़ानूनों के अमल को स्थगित रखना हमारे हाथ में है. लोग बाकी मसले कमिटी के सामने उठा सकते हैं.
चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, ‘हमें बताया गया कि कुल 400 संगठन हैं, क्या आप सभी की ओर से हैं. हम चाहते हैं कि किसान कमेटी के पास जाएं, हम इस मुद्दे का हल चाहते हैं हमें ग्राउंड रिपोर्ट बताइए. कोई भी हमें कमेटी बनाने से नहीं रोक सकता है. हम इन कानूनों को सस्पेंड भी कर सकते हैं. जो कमेटी बनेगी, वो हमें रिपोर्ट देगी.’
कोर्ट में याचिकाकर्ता एम एल शर्मा ने कहा कि मेरी कुछ किसानों से बात हुई है. वह किसी कमिटी के सामने नहीं जाना चाहते हैं. सिर्फ तीन कानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं.
किसान शांति से विरोध कर रहे हैं. उन्हें बदनाम किया जा रहा है. किसानों को कॉरपोरेट के हाथों में छोड़ देने की तैयारी है. ज़मीन छीन ली जाएगी. इसपर सीजेआई ने कहा कि हम अंतरिम आदेश में कहेंगे कि ज़मीन को लेकर कोई कांट्रेक्ट नहीं होगा.
CJI ने कहा कि अगर बिना किसी हल के आपको सिर्फ प्रदर्शन करना है, तो आप अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन करते रहिए.  लेकिन क्या उससे कुछ मिलेगा? उससे हल नहीं निकलेगा. हम हल निकालने के लिए ही कमिटी बनाना चाहते हैं.
सीजेआई ने कहा, ‘जो वकील हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता कि जब आदेश सही न लगे तो अस्वीकार करने लगें. कोर्ट में याचिकाकर्ता एम एल शर्मा ने कहा कि हमने पूर्व CJI खेहर समेत कुछ नाम सुझाए हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि बाकी लोग भी नाम सुझाएं. हम सब पर विचार करेंगे.
सांसद तिरुचि सीवा की ओर से जब वकील ने कानून रद्द करने की अपील की तो चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, ‘हमें कहा गया है कि साउथ में कानून को समर्थन मिल रहा है.
जिसपर वकील ने कहा कि दक्षिण में हर रोज इनके खिलाफ रैली हो रही हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि वो कानून सस्पेंड करने को तैयार हैं, लेकिन बिना किसी लक्ष्य के नहीं.’
वकील एम एल शर्मा ने कहा कि किसान यह भी कह रहे हैं कि सब आ रहे हैं, पीएम बैठक में क्यों नहीं आते. इस पर सीजेआई ने कहा कि हम पीएम मोदी से नहीं कहेंगे कि वह बैठक में आएं. इसके बाद सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कृषि मंत्री बात कर रहे हैं. यह उनका विभाग है.

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