Prabhat Times

प्रीत सूजी

चंडीगढ़। (Changes will happen in Punjab BJP, Amit Shah gave these indications within 24 hours) पंजाब की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी भी पंजाब में हाशिए पर जा चुकी हैं।
वोटबैंक के बाद अब दोनो पार्टियों का नेतृत्व भी बिखरता जा रहा है। इसी बीच काफी अर्से से पंजाब में गठबंधन के दम पर ही राज करने वाली पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने एकाएक तेजी पकड़ ली है। अमित शाह के 24 घण्टे का पंजाब दौरा कई बड़े संकेत दे रहा है।
कृषि बिल वापस लेने जैसे बड़े फैसले के बावजूद पंजाब में वोटबैंक प्रतिशत बढ़ने की बजाए पिछड़ जाने से भाजपा हाईकमान पंजाब की अग्रणी पंक्ति में खड़े नेताओं से ज्यादा खुश नहीं है।
हालात सामने हैं, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं की भाजपा में ऐंटरी हाईकमान के ज़रिए होना और सबसे अहम की देश के गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए सुनील जाखड़ को पार्टी स्टेज पर ज्यादा त्वज्जो देना, जाखड़ के घर हुए डिनर में पंजाब भाजपा के नेताओं की मौजूदगी न होना, ये ऐसे बड़े संकेत हैं जिससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में ‘नया पंजाब, भाजपा की नई टीम’ के साथ हो सकता है।
बता दें कि विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने नारा दिया था कि ‘नया पंजाब भाजपा के साथ’ होगा लेकिन पंजाब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नेगेटिविटी, कार्यकर्ताओं से दूरी और कथित तानाशाही के कारण चुनाव परिणाम ने भाजपा हाईकमान को सोचने पर विवश कर दिया।
कृषि बिल वापस लेने के बावजूद पंजाब में भाजपा का जनाधार नहीं बढ़ा। पार्टी हाईकमान के पास पंजाब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की जो रिपोर्ट पहुंची है, उससे पार्टी हाईकमान चिंतित भी है और ज्यादा खुश भी नहीं है। हैरानीजनक बात ये है कि पार्टी के दिग्गज नेता विधानसभा हल्का ही नहीं बल्कि अपने बूथ तक हार गए।

पंजाब के लिए भाजपा हाईकमान का ये है प्लान

सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में मजबूत बनाने की जिम्मेदारी अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथ में है। इसका ज्वलंत उदाहरण पिछले दिनों में पंजाब राजनीति में तेजी से हुए बदलाव हैं।
पहले सुनील जाखड़, मनजिन्द्र सिरसा का दिल्ली में भाजपा में शामिल होना और फिर कुछ दिनों बाद एक साथ कांग्रेस सरकार के चार पूर्व मंत्री, मेयर, अकाली नेताओं का चंडीगढ़ में अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा ज्वाईन करना, इस बात का संकेत है कि पंजाब को भाजपा हाईकमान का प्लान तैयार हो चुका है।
मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि नया पंजाब भाजपा की नई टीम के साथ ही होगा। इसी लेकर पंजाब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व चिंता में है।

अमित शाह ने दिए ये संकेत, चिंता में भाजपा शीर्ष नेतृत्व

बता दें कि अमित शाह चंडीगढ़ पहुंचे। इस दौरान पार्टी नेताओं के साथ बैठक हुई। लोक सभा चुनावों को लेकर मंथन हुआ, स्पष्ट कर दिया गया कि भाजपा लोकसभा चुनाव भी पंजाब में अकेले ही लड़ेगी।
शीर्ष नेतृत्व में चिंता इसलिए साफ क्योंकि अमित शाह द्वारा पार्टी स्टेज पर कांग्रेसी नेताओं की ज्वाईनिंग के समय और मीटिंग में भाजपा पंजाब के आला नेताओं की मौजूदगी के बावजूद सुनील जाखड़ को ज्यादा तवज्जो दी गई।
पार्टी स्टेज पर पहले तो सुनील जाखड़ की कुर्सी तक नहीं लगाई गई थी, लेकिन अमित शाह ने खुद उन्हें स्टेज पर बुलाया और अपने साथ कुर्सी लगवा कर बिठाया। इसके पश्चात पंजाब के पूर्व मंत्रियों की ज्वाईनिंग के समय भी जाखड़ से एक-एक करके सभी को मिलवाने के लिए कहा।
सुनील जाखड़ स्टेज पर अमित शाह के साथ ही नज़र आए और कई पलों में गुफ्तूगू करते दिखे। इस दौरान भाजपा नेता अमित शाह की स्टेज पर तो थे, लेकिन करीब नहीं थे। स्पष्ट दिखा कि अमित शाह द्वारा पंजाब भाजपा के नेताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई।
बात यहीं खत्म नहीं हुई, अमित शाह का डिनर भी सुनील जाखड़ के घर हुआ। हैरानीजनक बात ये रही कि अमित शाह के डिनर के दौरान पंजाब भाजपा की तरफ से कोई भी नेता नहीं था।
डिनर के दौरान गजेन्द्र शेखावत, अनुराग ठाकुर, मनजिन्द्र सिरसा तथा भाजपा ज्वाईन करने वाले कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री मौजूद रहे। ये भी बात सामने आई कि अमित शाह और सुनील जाखड़ के बीच एक घण्टे तक बंद कमरे में मीटिंग भी हुई।

जाखड़ को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, कई नेता होंगे जिम्मेदारी से मुक्त

अमित शाह के दौरे के बाद ये चर्चाएं तेजी से चल रही हैं कि पंजाब भाजपा में बड़े बदलाव होंगे। नया पंजाब भाजपा की नई टीम के साथ हो तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
आला सूत्रों के मुताबिक सुनील जाखड़, मनजिन्द्र सिरसा पंजाब भाजपा में बड़ी भूमिका में आ सकते हैं। भाजपा हाईकमान द्वारा अब दूरदर्शी सोच और प्लानिंग के साथ पंजाब में काम किया जा रहा है।
आने वाले समय में दूसरी पार्टीयों से आए नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है और भाजपा के कई बड़े नेताओँ को जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है।

भाजपा के नेताओं से रूष्ट है कार्यकर्ता और अब हाईकमान

बता दें कि पंजाब भाजपा में विद्रोह की चिंगारी काफी समय से उठ रही थी। कार्यकर्ताओं का यही आरोप रहा कि पंजाब भाजपा के अग्रणी पंक्ति में खुड़े कुछ नेताओं ने पंजाब में सैकेंड लाईन ही तैयार नहीं होने दी।
आरोप तो यहां तक लगते रहे कि इन नेताओं ने अपने हितों की खातिर किसान आंदोलन के दौरान भी पार्टी हाईकमान को जमीनी हकीकत से परिचित नहीं करवाया और मिसगाईड करते रहे। यही कारण रहा कि कृषि बिल वापस लिए जाने के बावजूद वोटरों तक नहीं पहुंच पाए।

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