Prabhat Times
नई दिल्ली। कृषि कानूनों (Farm Laws) को लेकर बड़ी केंद्र व किसानों के बीच दूरियां कम होनी शुरू हो गई है। 10वीं बैठक में केंद्र सरकार द्वारा विवाद के समाधान के लिए बड़ा सुझाव दिया कि वे कृषि कानून डेढ से 2 साल के लिए सस्पैंड कर देते हैं तथा एम.एस.पी. पर बातचीत के लिए ज्वाईंट कमेटी बनाई जा सकती है। साथ ही कानून सस्पेंड की अवधि के दौरान सरकार और कमेटी की बैठकें होती रहेंगी। इस सुझाव के बाद किसानों ने एक घण्टे तक आपस में बैठक की।
आपसी बैठक के बाद किसानों ने केंद्र सरकार के सुझाव को फिलहाल ठुकरा दिया है। किसान जत्थेबंदियों ने कहा कि वे कानून वापस से कम मानने को तैयार नहीं है। दोनो पक्षों के बीच अगली बैठक एक दिन बाद यानिकि 22 जनवरी की दोपहर 12 बजे फिर होगी।
बैठक से निकला किसानों ने कहा कि केंद्र ने उन्हें कहा है कि वे डेढ दो साल तक के लिए कानून सस्पैंड करने संबंधी अदालत में भी शपथ पत्र देने को तैयार हैं। लेकिन फिलहाल किसान कृषि कानून वापस लेने से कम नहीं माने हैं। किसान नेताओँ का कहना है कि वे कल 21 जनवरी को आपस में बैठक करेंगे और साथ ही कानूनी सलाह भी लेंगे।

लंच से पहले हुई ये बातें

लंच से पहले बैठक में सरकार ने एक बार फिर किसानों को तीनों बिलों के फायदे बताएं और कहा कि देश के बाकी राज्यों के किसान इन बिलों का समर्थन कर रहे हैं. यह उनके हित के लिए हैं.
आप लोग जो भी संशोधन चाहते हैं हम संशोधन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसानों की तरफ से साफ-साफ आज फिर बैठक में कहा गया कि हम तीनों बिलों की वापसी चाहते हैं. इससे कम हम को मंजूर नहीं है.
किसानों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पिछले बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि आपने कई बार संसद में और बाहर भी ये कहा है कि कृषि स्टेट सब्जेक्ट है तो आप लोग इसमें क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं.
कृषि मंत्री ने कहा कि हम किसानों के हितों के बारे में सोच रहे हैं, किसानों के लिए अच्छा कर रहे हैं. मामला अभी आगे नहीं बढ़ा है. वहीं पर बात अटकी पड़ी है. किसानों ने एमएसपी की बात करनी चाही तो सरकार की तरफ से कहा गया कि पहले तीनों कानूनों पर बात कर लेते हैं.

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