छात्राओं के दाखिले को लेकर सैनिक स्कूल प्रबंधन का बड़ा फैसला, पढ़ें

Prabhat Times

प्रीत सूजी

कपूरथला। सैनिक स्कूल (Sainik School) के इतिहास में पहली बार बालिकाओ के नामांकन करने का फैसला लिया गया है।
इस बात की जानकारी सैनिक स्कूल कपूरथला के प्रिंसिपल कर्नल प्रशांत सक्सेना ने देते हुए बताया कि देश सेवा का जज्बा रखने वाली बालिकाओ के लिए यह सुनहरी मौका है।
वह अब देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित 33 सैनिक स्कूलों में पढाई कर देश की आर्म्ड फ़ोर्स में चयनित हो देश सेवा निभा सकती है।
इस क्रम में स्कूलों में बालिकाओ के लिए उचित सुविधाओं सहित छात्रावास व शिक्षा व्यवस्था अलग से उपलब्ध करवाई जायगी।
बता दे कि पिछले 60 वर्षो से सैनिक स्कूल में मात्र लड़को के लिए ही दाखिले का प्रावधान था।
इस 6 दशकों के कार्यकाल में सैनिक स्कूल कपूरथला में अध्ययन और अध्यापन का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।
इस कार्यकाल में स्कूल से पढाई करने वाले 750 से अधिक छात्र देश विदेश के वभिन्न क्षेत्रों में अधिकारी बन अपनी सेवाएं दे रहे है।
जिनमे अधिक़तर देश की आर्म्ड फ़ोर्स में उच्च पदों पर तैनात हो देश सेवा में लगे हुए है।
कर्नल प्रशांत सक्सेना ने बताया कि इस बार के सैनिक स्कूलों में लड़कियों के दाखिले की मंजूरी के बाद अकेडमिक सेशन 2021-2022 में छठी कक्षा के लिए दाखिले का पंजीकरण वेब साइट https://aissee.nta.nic.in पर 3 दिसंबर तक किया जा सकता है।
जिस में प्रवेश परीक्षा 10 जनवरी 2021 को निर्धारित परीक्षा केंद्रो कपूरथला, फरीदकोट, अमृतसर, लुधियाना, और पटियाला में ली जायगी।
कर्नल प्रशांत सक्सेना ने बताया कि सैनिक स्कूल कपूरथला परिसर में बालिकाओ के लिए अलग से बेहतर सुविधाओं वाले छात्रावास की व्यवस्था की जा रही है।
उनकी देखभाल व सुरक्षा के लिए सुनिश्चित और पर्याप्त व्यवस्था भी निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की “बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ” की नीति का अनुसरण करते हुए सैनिक स्कूल कपूरथला पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
सीबीएसई के अंग्रेजी माध्यम से होने वाली स्कूल की पढाई के साथ साथ लड़के और लड़कियों के चहुमुखी विकास हेतु यह स्कूल प्रशासन प्रतिबद्ध है।
कर्नल प्रशांत सक्सेना ने कहा कि उनके स्कूल का उद्देश्य है कि शारीरक, मानसिक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों की प्राप्ति को प्राथमिक्ता देना है। सैनिक स्कूल कपूरथला इस मामले में अग्रणी है।
कियोंकि स्कूल के पास साधन और संसाधन की उचित व्यवस्था है। लड़के और लड़कियों की ट्रेनिंग की भी सर्वोत्तम व्यवस्था की गई है।

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