रामायण के बाद ये सीरीयल भी हो सकते हैं जल्द शुरू, पढ़ें कौन से

नई दिल्ली (ब्यूरो): कोरोना वायरस के खतरे के चलते किए गए लॉकडाऊन में लोगों को मनोरंजन के लिए भारत सरकार द्वारा दूरदर्शन पर प्रसिद्ध सीरीयल रामायण शुरू किया जा रहा है।

रामायण के शुरू होनो की तिथि अनाउंस होने के बाद अब लोगों द्वारा पुराने और सीरीयल भी पुनः शुरू करने की मांग की जा रही है।

जिस प्रकार से मांग जोर पकड़ रही है, उससे संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में श्री कृष्णा, शक्तिमान, चाणक्य, फौजी, मोगली जैसे सीरयल दोबारा शुरू हो सकते हैं।

‘रामायण’ के अलावा लोगों ने बी.आर. चोपड़ा के शो ‘महाभारत’ को भी फिर से दूरदर्शन पर दिखाने की अपील की है। बढ़ती डिमांड को देखते हुए प्रसार भारती के सीईओ ने भी उन्हें आश्वासन दे दिया है।

रामानंद सागर का ‘श्री कृष्णा’

रामानंद सागर के ‘श्री कृष्णा’ सीरियल के लिए भी ऐसी ही डिमांड उठी है। इस सीरियल ने भी 90 के दशक में खूब करिश्मा दिखाया था। हर रविवार को दूरदर्शन पर आने वाले इस सीरियल को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लग जाती थी। क्रेज ऐसा था कि लाइट चली जाती तो लोग इसे देखने के लिए बैटरी तक का इंतजाम कर लेते थे।

मुकेश खन्ना का ‘शक्तिमान’

‘शक्तिमान..ये आत्मशक्ति है, दुनिया बदल सकती है..’। यह गाना जैसे ही बजना शुरू हो जाता है, बच्चे भागकर टीवी के सामने बैठ जाते थे। सुपरहीरो शक्तिमान का रोल मुकेश खन्ना ने किया था। देखते ही देखते ‘शक्तिमान’ बच्चों से लेकर बड़ों तक का चहेता शो बन गया था।

डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का ‘चाणक्य’

डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी के शो ‘चाणक्य’ को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इस शो के जरिए अर्थनीति और राजनीति के महागुरु कौटिल्य यानी चाणक्य की कहानी को बड़े ही दमदार तरीके से दिखाया गया था। चाणक्य को लेकर और भी सीरियल बाद में बने, लेकिन 90s के ‘चाणक्य’ को कोई टक्कर नहीं दे पाया।

शाहरुख खान का ‘फौजी’

शाहरुख खान स्टारर ‘फौजी’ को भी फिर से टेलिकास्ट करने की लोगों ने मांग की है। 1988 में आए इस सीरियल से शाहरुख खान ने अपने टीवी करियर की शुरुआत की थी। इसे भी दर्शकों को खूब प्यार मिला था।

‘मोगली’ के नाम रहने वाला रविवार

‘जंगल जंगल बात चली है, पता चला है..चड्डी पहनके फूल खिला है, फूल खिला है..’ 90 के उस दौर पर दूरदर्शन पर हर रविवार जब ‘जंगल बुक’ शुरू होता, तो यही गाना बजता..और बच्चे जहां भी और जिस हाल में भी होते, दौड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे।