लालकिले से PM नरेंद्र मोदी ने किए ये बड़े ऐलान, पढ़ें

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Prabhat Times
नई दिल्ली। (PM Narinder Modi, Independence Day) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता (Independence) दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आने वाले समय में विकास की रूपरेखा खींची है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता (Independence) के अमृत महोत्सव के 75 हफ्तों में देश में प्रत्येक हफ्ते एक वंदेभारत ट्रेन चलेगी, यानी कि 75 हफ्ते में 75 वंदेभारत ट्रेनों की सुविधा देशवासियों को मिलने जा रही है.
प्रधानमंत्री मोदी ने इसके साथ ही देश के सभी सैनिक स्कूलों में छात्राओं को भी दाखिले देने का ऐलान किया. लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने कहा, ‘अब सरकार ने तय किया है कि देश के सभी सैनिक स्कूलों को देश की बेटियों के लिए भी खोल दिया जाएगा.’

पढ़िए प्रधानमंत्री स्वतंत्रता (Independence) दिवस पर किए बड़े ऐलान..

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने संकल्प लिया है कि स्वतंत्रता (Independence) के अमृत महोत्सव के 75 सप्ताह में 75 वंदेभारत ट्रेनें देश के हर कोने को आपस में जोड़ रही होंगी. आज जिस गति से देश में नए एयरपोर्ट्स का निर्माण हो रहा है, उड़ान योजना दूर-दराज के इलाकों को जोड़ रही है, वो भी अभूतपूर्व है. इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में होलिस्टिक अप्रोच अपनाने की भी जरूरत है. भारत आने वाले कुछ ही समय में प्रधानमंत्री गतिशक्ति-नेशनल मास्टर प्लान को लॉन्च करने जा रहा है.
पीएम ने कहा कि हम स्वतंत्रता (Independence) का जश्न मनाते हैं, लेकिन बंटवारे का दर्द आज भी हिंदुस्तान के सीने को छलनी करता है. यह पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है. कल ही देश ने भावुक निर्णय लिया है. अब से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि छोटा किसान बने देश की शान, ये हमारा सपना है. आने वाले वर्षों में हमें देश के छोटे किसानों की सामूहिक शक्ति को और बढ़ाना होगा. उन्हें नई सुविधाएं देनी होंगी. देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा किसान ऐसे हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है. पहले जो देश में नीतियां बनीं, उनमें इन छोटे किसानों पर जितना ध्यान केंद्रित करना था, वो रह गया. अब इन्हीं छोटे किसानों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सभी के सामर्थ्य को उचित अवसर देना, यही लोकतंत्र की असली भावना है. इसके लिए जो वर्ग पीछे है, जो क्षेत्र पीछे है, हमें उनकी हैंड-होल्डिंग करनी ही होगी. आज लाल किले से मैं आह्वान कर रहा हूं- सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास हमारे हर लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.’
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में 110 से अधिक आकांक्षी जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सड़क, रोजगार, से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. गांवों तक सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं को पहुंचाने का काम हो रहा है. गांवों तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, डाटा की ताकत पहुंच रही है, इंटरनेट पहुंच रहा है. गांव में भी डिजिटल कारोबारी तैयार हो रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि गांव में जो हमारी सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ीं 8 करोड़ से अधिक बहनें हैं, वो एक से बढ़कर एक प्रॉडक्ट्स बनाती हैं. इनके प्रॉडक्ट्स को देश में और विदेश में बड़ा बाजार मिले, इसके लिए सरकार अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तैयार करेगी.
उन्होंने ऐलान किया कि केंद्र सरकार अपनी अलग-अलग योजनाओं के तहत जो चावल गरीबों को देती है, उसे फोर्टिफाई करेगी, गरीबों को पोषणयुक्त चावल देगी. राशन की दुकान पर मिलने वाला चावल हो, मिड डे मील में मिलने वाला चावल हो, वर्ष 2024 तक हर योजना के माध्यम से मिलने वाला चावल फोर्टिफाई कर दिया जाएगा.
नॉर्थ ईस्ट की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी का नया इतिहास लिखा जा रहा है. बहुत जल्द नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों की राजधानियों को रेलसेवा से जोड़ने का काम पूरा होने वाला है. हमारा पूर्वी भारत, नॉर्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख सहित पूरा हिमालय का क्षेत्र हो, हमारी कोस्टल बेल्ट या फिर आदिवासी अंचल हो, ये भविष्य में भारत के विकास का बड़ा आधार बनेंगे.
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता (Independence) दिवस पर कहा कि केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख भी विकास की अपनी असीम संभावनाओं की तरफ आगे बढ़ चला है. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ‘सिंधु सेंट्रल यूनिवर्सिटी’ लद्दाख को उच्च शिक्षा का केंद्र बनाने जा रही है. उन्होंने कहा कि जम्मू हो या कश्मीर, विकास का संतुलन अब ज़मीन पर दिख रहा है. जम्मू कश्मीर में डी-लिमिटेशन कमीशन का गठन हो चुका है और भविष्य में विधानसभा चुनावों के लिए भी तैयारी चल रही है.
पीएम ने कहा कि ‘आज मैं एक खुशी देशवासियों से साझा कर रहा हूँ. मुझे लाखों बेटियों के संदेश मिलते थे कि वो भी सैनिक स्कूल में पढ़ना चाहती हैं, उनके लिए भी सैनिक स्कूलों के दरवाजे खोले जाएं: दो-ढाई साल पहले मिजोरम के सैनिक स्कूल में पहली बार बेटियों को प्रवेश देने का प्रयोग किया गया था. अब सरकार ने तय किया है कि देश के सभी सैनिक स्कूलों को देश की बेटियों के लिए भी खोल दिया जाएगा.’

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