खींचतान! CID के राडार पर नवजोत सिद्धू के शक्ति प्रदर्शन में पहुंचे MLA

Prabhat Times
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में फिलहाल माहौल शांत नहीं हुआ है। नए अध्यक्ष नवजोत सिद्धू (Navjot Sidhu) के साथ अधिकांश विधायक नज़र तो आ रहे हैं, लेकिन उधर, कैप्टन अमरिंदर सिंह की चुप्पी फिलहाल सभी को चुब रही है। कैप्टन की शर्त और इस बात पर सिद्धू की खामोशी से स्पष्ट है कि तकरार अभी थमी नहीं है। इसी बीच बड़ी खबर ये है कि सिद्धू के ‘शक्ति प्रदर्शन’ में शामिल कांग्रेस के कई विधायक सीआईडी के राडार पर भी बताए जा रहे हैं।

‘कई कांग्रेस विधायकों पर सीआईडी की नजर’

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिद्धू के साथ अमृतसर के गोल्डन टेंपल (स्वर्ण मंदिर) गए कई कांग्रेस विधायकों पर पंजाब क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) की नजर है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमिटी के नए चीफ सिद्धू के अमृतसर स्थित आवास पर पार्टी के विधायकों को बुलाया गया था। इसे कैप्टन के खिलाफ सिद्धू के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
सिद्धू के घर 62 नहीं 48 विधायक पहुंचे?
रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धू के घर के बाहर सादे कपड़ों में सीआईडी के अधिकारी निगरानी के लिए मौजूद थे। पहले इस बैठक में 62 विधायकों के पहुंचने की खबर आई थी। लेकिन सीआईडी अधिकारियों सूत्रों के मुताबिक वहां 48 विधायक पहुंचे थे। इनमें से हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए आम आदमी पार्टी के 3 विधायक भी थे।

‘कई दागी विधायक भी दिखे’

एक चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर में सिद्धू के आवास पर पहुंचे कांग्रेस विधायकों पर वह नजर रख रहे थे। अधिकारी के मुताबिक वे लोग अपनी ड्यूटी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में कुछ ऐसे विधायक भी पहुंचे थे, जिन पर संगीन आरोप हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब का संकट सुलझाने के लिए बनाए गए तीन सदस्यीय पैनल को इनमें से कुछ नेताओं के बारे में बताया भी था। कई विधायक ऐसे हैं, जिन पर अवैध खनन के खेल में शामिल होने का आरोप है।

कैप्टन-सिद्धू में सुलह अभी दूर की कौड़ी?

सूत्रों के मुताबिक सीआईडी की नजर जिन विधायकों पर है, उनमें से एक होशियारपुर से आते हैं। अवैध खनन और अवैध शराब के कारोबार से कनेक्शन को लेकर भी कुछ विधायक सीआईडी के रेडार पर बताए जा रहे हैं। जाहिर है पंजाब कांग्रेस का संकट अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू की यह तकरार कांग्रेस के लिए मुसीबत बढ़ा सकती है। पार्टी ने भले ही सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है लेकिन कैप्टन की तरफ से अब तक सुलह के संकेत मिलते नहीं दिख रहे हैं।

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