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शहर का युवा होटलियर भी शिअद की नज़र में!

प्रीत सूजी

जालंधर। शिरोमणि अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल के मिशन पंजाब को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान के अधीन राज्य में हर एक विधानसभा हल्का वोटरों और विजेता चेहरों को ढूंढने के लिए सर्वे शुरू हो चुका है।
बेहद ही योजनाबद्ध और प्रोफैशनल ढंग से चल रही वर्किंग से स्पष्ट है कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र से शिअद की टिकट लेना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।
शिअद सुप्रीमो को मिशन पंजाब के लिए बनाए गए मास्टर प्लान के तहत आज हम पंजाब की राजनीति में अहम माने जाते दोआबा के जालंधर से शुरूआत करते हैं।जालंधर के केंद्रीय विधानसभा हल्का अकाली दल के लिए फिलहाल खाली है। क्योंकि ये विधानसभा क्षेत्र शिअद की सहयोगी रही भाजपा के हिस्से में था। गठबंधन टूटने के पश्चात स्पष्ट है कि इन विधानसभा क्षेत्रों में अकाली दल अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारेगी।
जालंधर केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो इसमें डेढ लाख से अधिक वोटर हैं। ये सीट शुरू से ही कभी कांग्रेस और कभी भाजपा के उम्मीदवार की झोली में रही है। राजनीतिक विद्वानों की मानें तो जालंधर सैंट्रल क्षेत्र को हिंदू बहूल सीट ही कहा जाता है।
लेकिन अब देखना ये है कि शिरोमणि अकाली दल सुप्रीमो इस सीट पर क्या फैसला लेते हैं। फिलहाल के समीकरण के मुताबिक जालंधर के कई वरिष्ठ अकाली नेता इस सीट पर वर्किंग शुरू कर अपनी दावेदारी पार्टी अध्यक्ष के समक्ष रख रहे हैं।

कमलजीत भाटिया, कुलदीप ओबराए, तेजिन्द्र निज्जर, ढींढसा दावेदार!

इन में जालंधर में लगभग 10 साल तक सीनीयर डिप्टी मेयर रहे कमलजीत सिंह भाटिया, डिप्टी मेयर रही अरविन्द्र कौर ओबराए के पति वरिष्ठ नेता कुलदीप ओबराए, युवा नेता तेजिन्द्र निज्जर, ईकबाल सिंह ढींढसा, दावेदारी जताते हुए वर्किंग शुरू कर चुके हैं।
करीब 3 दशकों से पार्टी से जुड़े वरिष्ठ अकाली नेता कमलजीत सिंह भाटिया पिछले दिनों जालंधर केंद्रीय विधानसभा हल्का के अंर्तगत आते होटल में एक कार्यक्रम कर अपना शक्ति प्रदर्शन कर चुके हैं।
एस.जी.पी.सी. अध्यक्षा बीबी जगीर कौर की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में सिर्फ और सिर्फ सैंट्रल हल्के के अंर्तगत आते राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक संगठनो के प्रतिनिधि और वर्कर मौजूद रहे।
इसी प्रकार केंद्रीय विधानसभा हल्के में ही 4 बार लगातार पार्षद चुनाव लड़ कर जीत चुके कुलदीप ओबराए भी प्रमुख दावेदार हैं।
सर्वविदित है कि पिछले 40 सालों से पार्टी से जुड़े कुलदीप ओबराए व उनके परिवार को भाजपा से गठबंधन होने का नुकसान हुआ। कुलदीप ओबराए भाजपा नेताओं की राजनीति का शिकार बने।
जबकि युवा नेता तेजिन्द्र निज्जर का युवाओं में खासा रूतबा माना जाता है। वे अपने गांव के सरपंच भी रहे हैं। विरोधी राजनीतिक पार्टियों की प्रताड़ना तक झेल चुके युवा नेता तेजिन्द्र निज्जर पार्टी को समर्पित रहे। अब वे शहर में एक्टिवली काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही ईकबाल सिंह ढींढसा भी शहर की राजनीति में लंबे अर्से से एक्टिव हैं। उनकी पत्नी भी शहरी एरिया में पार्षद हैं।

अगर तलाश हुई हिंदू चेहरे की तो युवा होटलियर के नाम पर चर्चा!

जैसा कि पहले ही बता चुके हैं कि टिकट पाने के लिए शिअद सुप्रीमो को रिझाना आसान नहीं होगा। चूंकि शुरू से ही केंद्रीय विधानसभा हल्का को हिंदू बहूल सीट माना जाता है, तो संभव है कि शिअद भी इस सीट के लिए किसी हिंदू चेहरे की तलाश करेगा।
आला सूत्रों की माने तो शहर के बहुत ही प्रतिष्ठित युवा होटलियर को पार्टी के एक वर्ग द्वारा विजेता चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। ये युवा होटलियर की पारिवारिक पृष्ठभूमि शहर में कांग्रेस की जड़ों से जुड़ी हुई है।
शहर की अति-प्रतिष्ठित परिवार के इस युवा होटलियर का व्यापारिक घराने से जुड़ा होने के कारण हर वर्ग से नज़दीकियां हैं।
सर्वे टीम द्वारा इस युवा होटलियर को ध्यान में रखते हुए वोटों तक की कैलकूलेशन रिपोर्ट तैयार कर आलाकमान को दी गई है।
आला सूत्रों की मानें तो इस होटलियर की अनौपचारिक बैठक भी राज्य के बाहर हो चुकी है। लेकिन शिअद आलाकमान सीटों के मामले में किसी भी तरह से जल्दबाजी के मूड में नहीं है। अंतिम फैसला सही समय आने पर चुनावों के नज़दीक ही होगा।

प्रभात टाइम्ज़ द्वारा अन्य सीटों पर फिर चर्चा की जाएगी।

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