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जालंधर। घुटने, कूल्हे बदलने के हज़ारों सफल आप्रेशन कर कीर्त्तिमान स्थापित करने वाले आर्थनोवा अस्पताल (orthonova hospital) के डाक्टर हरप्रीत सिंह ने एक बार फिर चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है।
रीढ़ की हड्डी और डिस्क के आप्रेशन सफल न होने की अवधारणा को डाक्टर हरप्रीत सिंह ने गल्त साबित कर दिया है।
कुछ महीने में ही आधुनिक तकनीक से डाक्टर हरप्रीत सिंह द्वारा इंडोस्कोपिक स्पाईन सर्जरी से 250 से अधिक सफल आप्रेशन करके नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
पत्रकार वार्ता के दौरान आर्थोनोवा अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बताया कि पहले लोगों के मनों में अवधारणा बन चुकी थी कि रीढ़ की हड्डी तथा डिस्क के आप्रेशन कामयाब नहीं होते।
रीढ़ की हड्डी के आप्रेशन से कोई न कोई साईड इफैक्ट होता है। डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बताया कि अब ऐसा नहीं है।
लेकिन अब भारत में ऐसा तकनीक आ गई है जिसमें रीढ़ की ह़ड्डी के ये आप्रेशन बिना चीरे के हो सकते हैं।
इस आप्रेशन में सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई. के बाद बहुत ही बारीक यंत्रों से बिना चीरा दिए रीञ़ की हड्डी में प्रवेश किया जाता है।
इसके पश्चात नाड़ियों को बहुत ही कुशलता से अलग करके डिस्क निकाल दिया जाता है।
कई बार इस निकाले गए डिस्क की जगह धातु का डिस्क डाल दिया जाता है और कई बार अपने आप ही मांस भर कर रिकवरी हो जाती है।
ये विशेष आप्रेशन पूरे भारत में 1-2 जगह ही किया जाता है।
एक सवाल के जवाब में डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बताया कि रीढ़ की हड्डी के आप्रेशन करने की ये तकनीक जर्मनी और बैल्जियम से ली थी।
आर्थनोवा अस्पताल जालंधर में लगभग 250 से अधिक सफल आप्रेशन किए जा चुके हैं।
तकनीक के बारे में डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बताया कि मरीज को आप्रेशन के एक घण्टे बाद ही चलने के लिए कहा जाता है। चलने के बाद उसी दिन शाम तक अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।
डाक्टर हरप्रीत सिंह ने बताया कि मरीज़ को एक से ज्यादा दिन तक दाखिल होने की जरूरत नहीं होती।
एक सवाल के जवाब में डाक्टर हरप्रीत ने बताया कि इस आप्रेशन तकनीक में प्रयोग होने वाले यंत्र बेहद ही सूक्ष्म तथा उच्च क्वालिटी के हैं।
ये सभी यंत्र जर्मनी से आयात किए जाते हैं। आप्रेशन से पहले स्टैडिंग एम.आर.आई. होती है।
जिससे डिस्क के बारे में आप्रेशन के लिए तकनीकी जानकारी मिल जाती है कि डिस्क कहां है, किस साईड में है और किस नाड़ी पर प्रैशर बढ़ रहा है।
डाक्टर हरप्रीत ने बताया कि स्टैडिंग एम.आर.आई. सिर्फ जालंधर में आर्थोनोवा अस्पताल में ही उपलब्ध है।
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